
दिल्ली/वृन्दावन.26 अक्टूबर।
सुनील कुमार जांगड़ा.
गौभक्त श्री संजीव कृष्ण ठाकुर जी श्रीधाम वृन्दावन
द्वारा बताया कि मानसिक दुर्बलता आध्यात्मिक उन्नति में बाधक का कार्य करती है। कायर व्यक्ति जीवन में कभी भी आध्यात्मिक उन्नति नहीं कर सकता है। अध्यात्म कायरों और अकर्मण्यों का मार्ग नहीं अपितु कायरता और अकर्मण्यता का त्याग करने वालों का मार्ग है। अध्यात्म का मार्ग जिम्मेदारियों से बचना भी नहीं अपितु छोटी-मोटी जिम्मेदारियों को त्यागकर एक बड़ी जिम्मेदारी उठाने के साहस का मार्ग है।
आत्मबल की न्यूनता से ग्रसित मन कभी भी किसी बड़े संकल्प के लिए राजी नहीं हो सकता है। दृढ़ संकल्प शक्ति के अभाव में अध्यात्म पथ की ओर गति संभव ही नहीं है। दृढ़ इच्छाशक्ति ही व्यक्ति को दृढ़तापूर्वक श्रेष्ठ पथ की ओर अग्रसर बनाये रखती है। स्वयं की चिंता को त्यागकर स्वयंभू के चिंतन का नाम ही अध्यात्म है। सही अर्थों में स्वयं के कष्टों का विस्मरण कर समष्टि के कष्टों के निवारण की यात्रा ही वास्तविक आध्यात्मिक यात्रा है।
